राष्ट्रहित को लगा भूकंप का झटका

राहुल बजाज के भाषण के बाद हमारा बजाज जैसा समर्थन और राष्ट्रहित को लगा भूकंप का झटका। मूल खबर जब हिन्दी में नहीं छपी तो यह प्रतिक्रिया क्या छपेगी। पढ़िए, दिलचस्प है। ट्रोल सेना से वश का नहीं लगा तो मैदान में बड़े लोग उतारे गए और क्या क्या हुआ। गृहमंत्री सीमा सुरक्षा बल के कार्यक्रम में नहीं जा पाए वह भी एक सूचना है जो इस खबर में नहीं है और वह अलग खबर है।
देशभक्ति, राष्ट्रहित, राष्ट्रवाद के बीच सीमा सुरक्षा बल के कार्यक्रम में बिना कारण बताए नहीं जाना। इससे पहले पहले आईटीबीपी के आयोजन में भी नहीं जा पाए थे और उससे पहले सीआरपीएफ का राशन भत्ता कम कर दिया गया था। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री का नाम मैंने कल ही जाना और यह समझना मुश्किल नहीं है कि गृहमंत्री की व्यस्तता झारखंड चुनाव के मद्देनजर हो सकती है। दिलचस्प यह है कि इससे पहले आईटीबीपी का कार्यक्रम उसी दिन था जिस दिन महाराष्ट्र और हरियाणा के नतीजे आए थे। पता नहीं आगे भविष्य में तारीख अलग रखने पर विचार किया गया कि नहीं। जाहिर है यह सब गृहमंत्री और भाजपा अध्यक्ष की दोहरी भूमिका के कारण हो रहा है पर कार्यक्रम बनाने वाले तो पूछकर और अनुभव से ही बनाते होंगे। फिर भी … खबर पढ़ने लायक है। ऐसे कार्यक्रमों में गृहमंत्री की अनुपस्थिति का संदेश क्या जाएगा राम जानें।
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