टीम इंडिया की जीत के मायने

टीम इंडिया की ऐतिहासिक जीत
– वीर विनोद छाबड़ा
कोलकोता के ईडन गार्डन में टीम इंडिया ने बांग्लादेश को सवा दो दिन में ही एक इनिंग और 46 रन से हरा कर टेस्ट सीरीज़ 2-0 से जीत ली है। ये ख़बर इसलिए बहुत अच्छी है क्योंकि ये इंडिया में पिंक बॉल से खेला गया पहला टेस्ट था और वो भी डे-नाईट। यों तो इंडिया के लिए अपेक्षाकृत बहुत कमज़ोर बांग्लादेश को हराना कभी भी मुश्किल नहीं रहा है, मगर ये जीत इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ये विश्व चैंपियनशिप का हिस्सा है। यों भले इंडिया ने बांग्लादेश को आसानी से पहली इनिंग में 106 और दूसरी इनिंग में 195 पर रोक दिया, मगर बांग्लादेशियों को भी दाद देनी होगी कि उन्होंने मज़बूत बैटिंग लाइनअप वाली टीम इंडिया को 347/9 रन ही बनने दिए। इसमें अगर कप्तान विराट कोहली के 136 रन न होते तो अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि पिंक बॉल के साथ डे-नाईट क्रिकेट खेलना कितना मुश्किल है। और अगर सामने बांग्लादेश न होकर ऑस्ट्रेलिया या इंग्लैंड होती तो इंडिया के लिए मुश्किलें कुछ ज़्यादा ही होतीं। विदेशी ज़मीं पर तो हालात संगीन ही होते। इसीलिए कुछ विद्वान् अगर कह रहे हैं कि बहुत खुश होने की ज़रूरत नहीं है तो ग़लत नहीं कह रहे हैं। बहरहाल, सबसे अच्छी बात तो ये रही कि भारतीय ज़मीन पर एक मुद्दत के बाद टेस्ट में फुलहॉउस देखने को मिला। और दो राय नहीं कि इसके पीछे क्रिकेट बोर्ड के नए अध्यक्ष ‘दादा’ सौरव गांगुली की नई सोच है। भविष्य में भी टेस्ट मैचों में ऐसी ही भीड़ देखने को मिलेगी, ये उम्मीद तब तक तो करनी चाहिए जब तक दादा बोर्ड के अध्यक्ष हैं। एक और अच्छी बात हुई कि भले बांग्लादेशी टीम का खेल स्तर बहुत अच्छा नहीं था लेकिन उन्हें इज़्ज़त पूरी दी गयी, क्राउड ने उनके अच्छे शॉट्स पर जम कर तालियां दीं। मीडिया ने भी अच्छी कवरेज दी। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना वाज़ेद को बतौर ख़ास मेहमान बुलाया गया। ये भी याद रखना चाहिए कि ये टीम अपनी पूरी स्ट्रेंथ के साथ नहीं खेल रही थी। उनका वर्ल्ड क्लास स्टार आलराउंडर शाकिब अल हसन प्रतिबंध के कारण मैदान में नहीं था। मैचों के दौरान कई खिलाड़ी ज़ख़्मी भी हुए। वरना ये टीम एकदिनी और ट्वेंटी20 फोर्मट्स में बहुत ही खतरनाक है। उनका स्तर सुधारने के लिए इंडिया को चाहिए कि उनके साथ रेगुलर क्रिकेट खेला करें। साल में कम से कम एक छोटी सीरीज़ ज़रूर हो। ऐसा करना एक अच्छे पड़ोसी होने का फ़र्ज़ भी है। और दो राय नहीं कि इससे आपसी कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंध भी ज़्यादा मज़बूत होंगे।

२४ नवंबर २०१९
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