चंचल जी – पुलिस और सुरक्षा ?

हमे अपनी हार की पूर्व जानकारी थी ,शायद इसलिए भी हम मस्ती के साथ चुनाव लड़ रहे थे । वह कांग्रेस के बुरे दिन थे और हम काँग्रेस की तरफ से उम्मीदवार थे। एक साँझ हम प्रचार कर के लौटे और आत्मा मिठाई।की दुकान जो कि हमारा अड्डा हुआ करता था ( जिला जौनपुर का ब्लॉक महराजगंज , महराजगंज की मशहूर दुकान आत्मा मिठाई वाले ) आकर हम खड़े ही हुए थे कि दो पुलिस वाले जो काफी देर से हमारा इंतजार कर रहे थे आकर सामने खड़े हो गए ।
– आप चंचल ?
– जी , हूं , फिर कोई बवाल ? ले चलो जहां ले चलना हो ।
– नही सर !हम आपको लेने नही आये हैं आपकी सुरक्षा के लिए आये हैं ।
– हमे कौन सा खतरा आ गया भाई ?
– ये तो हम नही जानते सर लेकिन हमे आपकी सुरक्षा के लिए भेजा गया है ।
– लेकिन हमें कोई खतरा नही है भाई ! आप वापस जाँय ।
– हम नही जा सकते सर । कप्तान साहब से बात करिये ।
हमने जौनपुर कप्तान को फोन किया ।
– चंचल बोल रहा हूँ , गड़वारा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की तरफ से उम्मीदवार हूं ।
– जी बताएं !,
– आपने दो पुलिस भेजे हैं हमारी सुरक्षा के।लिए । कप्तान साहब ! अगर हम खुद को सुरक्षित नही कर पा रहे हैं तो हम जनता के सुरक्षा की बात कैसे करेंगे ? हमे कोई सुरक्षा फोर्स नही चाहिए।
– चंचल जी ! आप जो बोल रहे हैं , सही है लेकिन आप एक राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस की तरफ से उम्मीदवार हैं । अगर आप नही चाहते तो इसी नोट को लिखित रूप से हमे भेज दें , इन पुलिसवालों के हाथ
हम कल बात करेंगे ।
हमने आत्मा से 200 रुपये उधार लेकर पुलिसवालों को किराया दिया वापस भेजा । दूसरे दिन अलसुबह अखबार में पुलिसकप्तान डॉ कुमार की प्रेस वार्ता ही हम पर आयोजित थी ।
बाद में कप्तान साहब हमारे अच्छे दोस्त बन गए ।
आज कल नेता (?) पुलिस के साये में सीना तान कर चलता है तो बेशाखता हँसता हूं ।
यह अपनी जीवनी में लिखूं ? लोग हंसेंगे । मूर्ख हो , आज की तारीख में बंदूक के साये में जीना सियासत की नई रवायत है । स्टेटस सिंबल है । अनुष्का ( हमारी नातिन जिसने जिद किया कि लिखो नानू । क्या यह पचेगा आज की पीढ़ी को ? )
भाई अम्बरीष ने एक और आयाम दे दिया । पढ़ना और पढ़ाना है । शुक्रवार के लिए है ।
अनुष्का ! यह हमें किसी भाषण से नही मिला है । तवारीख के पन्ने पर जड़ा मिला है । सुन लो
आजादी कस जश्न मनाया जा चुका है ( 15 अगस्त 47 ) इसमे बापू नही शामिल थे । दिल्ली जल रही थी । हिन्दू मुस्लिम टकराव का केंद्र था । गांधी जी को बुलाया ।पंडित नेहरू ने । प्रधानमंत्री थे । देश के प्रधानमंत्री बापू को लेने दिल्ली टेशन आये । उनके साथ एक बंदूकधारी
पुलिस वाला था । बापू ने यह देखा तो पूछा – यह पुलिसवाला क्यों ?
पंडित नेहरू ने सफाई दी – बापू ! दिल्ली की हालत बहुत खराब है ।
बापू ने कहा – तुम मर जाते , इतना ही होता न । लेकि पुलिस की सुरक्षा में ?
पंडित नेहरू खुद गाड़ी चलाने लगे पुलिस का सिपाही वापस ।
अनुष्का !, तुम चाहती हो यह लिखूं की हमने यहां से यह सीखा ?
श्री मती इंदिरा गांधी को यह सूचना थी कि उनको हत्या होगी । विचलित नही हुई ।
जार्ज विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार में रेलमंत्री बने । अपने गेट का फाटक ही तुड़वा दिया। हम सुरक्षित हैं ।
अनगिनत किस्से हैं अनुष्का ! पाठक पसंद करेगा
. ?
चलो लिख देता हूँ ।

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