दांत चियारने से और थाली लोटा बजाने से समाधान नहीं निकलता

तमाम लोग दांत चियार रहे हैं कि इटली स्वास्थ्य सेवा में नम्बर 2 है, वहां सबसे ज्यादा मौतें हुईं। अमेरिका में लोग मर रहे हैं। भारत की स्वास्थ्य सेवा को कोसने या यह पूछने का कोई मतलब नही है कि सत्ता में आते ही नरेंद्र मोदी सरकार ने 10 एम्स बनाने की घोषणा की और अब तक एक भी तैयार नहीं हुआ।
स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़े के मुताबिक केरल में 96 मरीज स्वस्थ हुए हैं और 2 की मौत हुई। वहीं मध्य प्रदेश में एक भी मरीज स्वस्थ होकर नहीं लौटा है और 2 की मौत हो गई। महाराष्ट्र में मरने वाले शतक लगाने जा रहे हैं और 125 लोग स्वस्थ होकर निकले हैं। पंजाब में 4 स्वस्थ होकर निकले और 8 मर गए। भारत में केरल की स्वास्थ्य व्यवस्था सबसे अच्छी मॉनी जाती है।
अच्छी स्वास्थ्य व्यवस्था जरूरी है। दांत चियारने से और थाली लोटा बजाने से समाधान नहीं निकलता। भारत में डॉक्टरों के पास बुनियादी सहूलियतें नहीं हैं जिससे वे खुद सुरक्षित रहकर मरीज देख सकें। अब हालत यह आ गई है कि डॉक्टर व उनके स्टाफ खुद कोरोना के शिकार हो रहे हैं। डॉक्टर सब अस्पताल छोड़ छोड़कर भाग रहे हैं। अस्पताल ही बन्द करना पड़ रहा है डाक्टरों में इंफेक्शन फैलने पर।
जो खबरें आ रही हैं वो बहुत बुरे संकेत दे रही हैं। आपने चीन के खान पान के मजाक उड़ाने से शुरुआत की। इटली, स्पेन, अमेरिका के डॉक्टरों का मजाक उड़ाया कि वो कुछ नहीं कर पा रहे हैं। कहीं ऐसा न हो कि आपकी और आपके परिवार की जिंदगी ही मजाक बन जाए।
ध्यान रहे कि जर्मनी के वित्त मंत्री की तरह आपकी वित्त मंत्री आपके दुख से दुखी होकर आत्महत्या नहीं करेंगी। न तो ब्रिटेन के प्रधानमंत्री या स्पेन की समाजसेवी राजकुमारी की तरह आपके प्रधानमंत्री को कोरोना पकड़ने वाला है। वो अपनी कोटरी में सुरक्षित हैं । आपकी मौत पर वह खुश होंगे कि धरती पर से बोझ हटा, और बचे लोगों से ताली और थाली बजवाएँगे।

सुरक्षित रहने का एक ही तरीका है कि जहां तक सम्भव है, समाज से शारीरिक दूरी बनाएं और मानसिक दूरी कम करें। एक दूसरे के मददगार बनें।
Satyendra PS जी की खरी खरी

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