नमामि गंगे की योजना पर अभी तक कोई जवाब सरकार द्वारा नही

अखबारों के पन्ने पलटता रहा, न्यूज़ वेबसाइट को खंगालता रहा,…….. लेकिन कही भी इस बात की कोई चर्चा नही थी कि नमामि गंगे योजना में आखिर अब तक हुआ क्या है जो प्रधानमंत्री मोदीं समीक्षा बैठक करने कानपुर पुहंचे है?…….. आखिरकार समीक्षा किस चीज की हो रही है….. कोई खबर नही है!……….’नमामि गंगे’ की डेडलाइन 2020 है, लेकिन सूत्र बता रहे हैं कि अब तक इसके 10 फ़ीसदी प्रोजेक्ट भी ठीक से पूरे नहीं हुए हैं……..

2014 के चुनाव में बनारस में मोदी जी ने जुमला दिया था कि ‘मुझे न किसी ने यहाँ भेजा है और न मैं आया हूँ. मुझे तो माँ गंगा ने बुलाया है’……… जीतने के बाद उन्होंने जुलाई 2014 में जल मंत्रालय का नाम बदलकर जल संसाधन, नदी विकास गंगा संरक्षण मंत्रालय रख दिया। इस मंत्रालय की स्थापना गंगा में बढ़ रहे प्रदूषण और उसके संरक्षण के लिए की गयी थी। इस मंत्रालय की जिम्मेदारी उमा भारती को दी गयी। इस कार्यक्रम के लिए पिछले तीन दशक में नदी की सफाई और संरक्षण पर जितना धन खर्च किया गया है, उसमें चार गुणा बढोतरी करते हुए 20,000 करोड रुपए के बजट को मंजूरी दी गई. जुलाई 2017 में राज्यसभा में बोलते हुए उमा भारती ने कहा कि गंगा को लेकर जो नयी शुरुआत की गयी है उसके परिणाम 2018 तक दिखने लगेंगे। लेकिन सितम्बर 2017 में उमा भारती को इस मंत्रालय से हटाकर नितिन गडकरी को इस मंत्रालय की जिम्मेदारी दे दी गयी बीच मे उमा भारती का यह बयान भी चर्चा का केंद्र बना कि गंगा की सफाई का काम अगर अक्टूबर 2018 तक नहीं पूरा हुआ तो मैं मरते दम तक अनशन पर बैठूँगी। मई 2018 में नितिन गडकरी बोलते है कि गंगा की सफाई का 70 से 80 प्रतिशत काम अगले मार्च तक पूरा हो जायेगा। मार्च 2019 बीत चुकी है मार्च 2020 आने में तीन महीने से भी कम का वक्त है और बड़े शहरों, 23 छोटे शहरों और 49 कस्बों में जो 231 परियोजनाएं चल रही हैं वह अधिकांशतः अधूरे पड़े हुए हैं

सरकार ने मार्च 2020 तक गंगा को पूरी तरह प्रदूषण मुक्त करने का दावा किया है कोई पत्रकार यह सवाल नही उठा रहा है कि आखिर नमामि गंगे की योजना जो अब पूर्ण होने वाली है उसमें क्या प्रगति हुई है……..

पिछले महीने इलाहाबाद हाईकोर्ट के तीन जजों की पूर्ण पीठ ने केंद्र सरकार से नमामि गंगे प्रॉजेक्ट कार्य के प्रगति की जानकारी मांगी है। कोर्ट ने पूछा कि जितने भी एसटीपी स्थापित किए गए हैं, वे ठीक से कार्य कर रहे हैं या नहीं? उनकी क्या स्थिति है और गंगा में नाले का गंदा पानी सीधे कैसे जा रहा है? उन्हें रोकने का इंतजाम क्यों नहीं किया गया है और गंगा में न्यूनतम जल प्रवाह रखने की क्या योजना है?

अभी तक कोई जवाब सरकार द्वारा नही दिया गया है हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस संबंध में केंद्र सरकार से कार्य योजना की जानकारी मांगी थी लेकिन केंद्र सरकार ने अभी तक कोई जानकारी नहीं दी है। राज्य सरकार से भी गंगा में गिर रहे नालों और एसटीपी के संचालन के संबंध में जवाबी हलफनामे मांगे गए थे। उसका भी जवाब दाखिल नहीं किया गया है। गंगा में एसटीपी से शुद्ध हुए पानी में बायोकेमिकल पॉलिफॉर्म गंगा जल में मिलकर प्रदूषण फैला रहा है लेकिन कोई चिंता नही है याचिका पर अगली सुनवाई 3 जनवरी को है

प्रधानमंत्री मोदीं ने आज फिर से एक नया जुमला उछाल दिया है ‘अर्थ गंगा’ का, मीडिया फिर से वाह वाह करने में व्यस्त हो गया है.

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