जेएनयू की जो लड़कियां सड़क

उस दिन जेएनयू की जो लड़कियां सड़क पर थीं
वह महज लड़कियां नहीं थीं
लड़कियां होतीं तो घर में बैठतीं
चूल्हा-चौका संभालतीं
पिता,भाई, पति सभी को
रिश्ते के हिसाब से सुख देतीं।

वह लड़कियां इंसान थीं
हड्डियों और मांस के अलावा
उनके पास था एक सपना।

तुम उनपर लाठियां चला सकते हो
उनकी बेइज्जती कर सकते हो
लेकिन उनके हौसले, उनके सपने?

तुम डरो उनसे
यही तुम्हारी हार है
और तुम्हारा डरना
उन लड़कियों की जीत।
अमरेन्द्र यादव 

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