लक्ष्मणपुर बाथे नरसंहार में चंद्रशेखर और यशवंत सिन्हा भी रणवीर सेना के साथ!!

लक्ष्मणपुर बाथे नरसंहार में चंद्रशेखर और यशवंत सिन्हा भी रणवीर सेना के साथ!!

लक्ष्मणपुर बाथे नरसंहार के आरोपितों का कहना है कि पूर्व प्रधानमन्त्री चंद्रशेखर की मदद से उन्हें हथियार मिले थे और पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा ने उनकी राजनीतिक और आर्थिक मदद की थी..

खोजी पत्रकारिता के लिए मशहूर वेबसाइट ‘कोबरापोस्ट’ का एक नया स्टिंग ऑपरेशन सामने आया है. इस स्टिंग ऑपरेशन में ‘रणबीर सेना’ के कई पूर्व कमांडर दलितों की हत्या करने की बात स्वीकारने के साथ ही कई सनसनीखेज खुलासे करते दिख रहे हैं. इसके अनुसार मुरली मनोहर जोशी, सीपी ठाकुर और सुशील मोदी जैसे बड़े राजनेताओं के साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर भी रणवीर सेना की प्रत्यक्ष या परोक्ष तरीके से मदद कर चुके हैं. यह आजाद भारत का सबसे बड़ा और क्रूरतम जातीय नरसंहार माना जाता है..

रणबीर सेना बिहार के सवर्ण जातियों से जुड़े जमींदारों का बनाया गया एक संगठन था. इस संगठन पर बिहार में सैकड़ों दलितों के नरसंहार का आरोप है. इनमें बथानी टोला, शंकर बिगहा, सरथुआ, इकवारी, मियांपुर और लक्ष्मणपुर बाथे नरसंहार प्रमुख हैं. इन्हीं नरसंहारों के आरोपितों में शामिल रणबीर सेना के छह पूर्व कमांडरों का कोबरापोस्ट ने स्टिंग किया है.

एक दिसंबर 1997 जहानाबाद जिले का लक्ष्मणपुर बाथे गांव में हुए इस नरसंहार में कुल 58 लोगों की हत्या कर दी गई थी. इस मामले में कुल 46 लोगों को आरोपित बनाया गया था. इनमें से 19 लोगों को निचली अदालत ने ही बरी कर दिया था जबकि एक व्यक्ति सरकारी गवाह बन गया था. बाकी आरोपितों में से 16 को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी और 10 को उम्रकैद हुई थी.

लेकिन 2013 के अंत में पटना उच्च न्यायालय ने सबूतों के अभाव में सभी आरोपितों को बरी कर दिया था. इसी तरह शंकर बिगहा में हुई 23 दलितों की हत्या के सभी आरोपित भी न्यायालय द्वारा बरी किये जा चुके हैं. बथानी टोला और मियांपुर नरसंहार में भी रणबीर सेना के सभी आरोपित सदस्यों को न्यायालय बरी कर चुका है.

कोबरापोस्ट ने अपने हालिया स्टिंग ऑपरेशन ‘ब्लैक रेन’ में रणबीर सेना के चंद्रकेश्वर सिंह, सिद्धनाथ राय, प्रमोद सिंह, रवींद्र चौधरी, भोला राय और अरविंद सिंह के बयानों को ख़ुफ़िया कैमरों में कैद किया है. इनमें से कुछ को न्यायालयों ने बरी कर दिया है जबकि कुछ आज भी जेल में कैद हैं. कोबरापोस्ट के कैमरों पर इन लोगों ने यह कबूल किया है कि इन्होंने ही दलितों के नरसंहार में मुख्य भूमिका निभाई थी.

कुछ ने तो यहाँ तक बताया है कि धनबाद के बाहुबली नेता सूर्यदेव ने तत्कालीन प्रधानमन्त्री चंद्रशेखर से अपनी नजदीकियों के चलते भारतीय सेना के पुराने हो चुके हथियार रणबीर सेना को उपलब्ध करवा दिए थे. इसके साथ ही इन लोगों ने अटल बिहारी वाजपेयी के मंत्रिमंडल में शामिल रहे यशवंत सिन्हा का नाम लेते हुए यह भी कहा है कि उन्होंने रणबीर सेना की राजनीतिक मदद करने के साथ ही साढ़े पांच लाख रूपये की वित्तीय मदद भी की थी.

कोबरापोस्ट ने इस ऑपरेशन के दौरान जस्टिस अमीर दास से भी बात की है. जस्टिस दास पटना उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश रहने के साथ ही लक्ष्मणपुर बाथे नरसंहार की जांच के लिए बने आयोग के अध्यक्ष भी रहे हैं. वे कोबरापोस्ट को बताते हैं कि शिवानंद तिवारी, सीपी ठाकुर, मुरली मनोहर जोशी और सुशील कुमार मोदी जैसे नेताओं ने जांच को प्रभावित करने की कोशिश की थी.

बिहार में हुए इन दलित नरसंहारों के कई मामले आज भी विभिन्न न्यायालयों में लंबित हैं. माना जा रहा है कि कोबरापोस्ट के इस ‘ऑपरेशन ब्लैक रेन’ के बाद ऐसे मामलों की सुनवाई प्रभावित हो सकती है. कुछ लोगों का यह भी मानना है कि बिहार चुनाव से ठीक पहले आये इस स्टिंग ऑपरेशन के पीछे कुछ राजनीतिक ताकतें भी हो सकती हैं.

(1974 के बिहार आंदोलन और उसके बाद भी लोकनायक जय प्रकाश नारायण के निजी चिकित्सक रहे डॉ. सीपी ठाकुर को कालाजार पर अन्तरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विशेषज्ञता का रुतबा हासिल है..कालाजार रोगियों के लिये भगवान से कम हैसियत नहीं रही है.. फिर वह सांसद बने, देश के स्वास्थ्य मंत्री भी बन गये..लेकिन तब तक उन्हें कालाजार से विरक्ति हो चुकी थी..हां, विश्व स्वास्थ्य संगठन से उन्हें कालाजार उन्मूलन के नाम पर डॉलरों की सौगात नियमित दी जाती रही..एक सरकारी आयोग की गैर सरकारी रिपोर्ट के अनुसार कई नरसंहारों की जनक रणवीर सेना के पदाधिकारी भी हैं डॉ. सीपी ठाकुर..1996-98 के दौरान हुए जहानाबाद के हैबसपुर और लक्ष्मणपुर बाथे नरसंहारों में सीबीआई ने उनके खिलाफ चार्जशीट तैयार की थी.. कई दिन तक भूमिगत रहे, फिर सुन्दर सिंह भन्डारी के कार्यकाल में राज्यपाल भवन में काफी समय छुपे रहे.. उस समय राज्यपाल का ओएसडी डॉक्टर साहब का ही कोई रिश्तेदार था, उसी की बदौलत मामला सुलटा..केन्द्र में सत्ता बदली तो स्वास्थ्य मंत्री बने, रिश्वत के एक मामले में हटाये गये, फिर दूसरा मंत्रालय थमा दिया गया..)

राहुल कोटियाल…के साथ..

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