राहुल बजाज ने सही कहा

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सरकार को अपनी नालायकी का अंदाजा बिल्कुल नहीं है

राहुल बजाज के बयान पर ट्रोल सेना जो कर रही है वह यह साबित करने के लिए काफी है कि राहुल बजाज ने सही कहा। पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जो कहा वह ज्यादा दिलचस्प है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया में कुछ लोगों ने उन्हें सबसे खराब वित्त मंत्री कह दिया, लेकिन मैंने कुछ नहीं कहा। मैं नहीं जानता सबसे खराब वित्त मंत्री कहना किस कानून का उल्लंघन है और इसके लिए वित्त मंत्री क्या सजा चाहती हैं। और मैं इस सरकार से जितना डरता हूं उससे लग रहा है कि इसके लिए भी कोई कानून बन जाएगा। हालांकि वह अलग मुद्दा है पर अभी चिन्ता की बात यह है कि सरकार को अपनी आलोचनाओं का अंदाजा ही नहीं है।

अगर वे यह कहना चाहती हैं कि सबसे खराब वित्त मंत्री कहने पर उन्होंने कुछ नहीं कहा इसलिए यह नहीं कहा जाए कि डर का माहौल है तो साफ है कि उन्होंने राहुल बजाज की बात समझी ही नहीं। ऐसे में जब वे (और सरकार) कह रही हैं कि लोग उनकी निन्दा करते ही हैं तो शायद वे यह नहीं जानती हैं कि इक्के दुक्के बड़े उद्यमियों को छोड़कर कोई भी कारोबारी संगठन सरकार की नीतियों के खिलाफ नहीं बोलता है। निश्चित रूप से यह डर के कारण है। पर मुमकिन है कि वे समझ रही हों कि देश में आर्थिक मोर्चे पर सब सही है और अगर कोई बोल नहीं रहा है या लोग बोल ही रहे हैं तो बोलने के लिए इससे ज्यादा नहीं है। यह डर के माहौल से ज्यादा निराशाजनक स्थिति है और साफ करता है कि सरकार को अपनी नालायकी का अंदाजा बिल्कुल भी नहीं है।

उद्यमी क्या बोलेंगे और क्यों नहीं डरेंगे अगर चुनाव आयुक्त अशोक लवासा और उनके करीबियों के खिलाफ जांच हो सकती है। समस्या यह है कि सरकार सुनती नहीं है और लोग आलोचना करते नहीं है इसीलिए ये हालात हैं और फिलहाल कोई उम्मीद नहीं है। यह काम मीडिया वालों का था पर मीडिया ने तो राहुल बजाज का बयान तब छापा जब दुनिया जान गई और आज छापा तो यह नहीं छापा कि ट्रोल सेना ने राहुल बजाज के खिलाफ कैसे गोले दागे और अमित शाह का जवाब साथ छापकर पूरा संतुलन बनाया है।

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