विदेशनीति और आर्थिक बदहाली

विदेशनीति और आंतरिक व्यवस्था एवम् आर्थिक बदहाली कुल मिलाकर एक दूसरे से जुड़े हुए पहलू हैं।

उद्योग और रोजगार सरकार की अदूरदर्शी एवम् मूर्खतापूर्ण नीतियों से कैसे बरबाद होते हैं इसका उदाहरण हमारा अमेरिका का पिट्ठू होना और विदेशनीति को गिरवी रखना सामने है।

भारत द्वारा केवल ईरान को बहुत बड़ी संख्या में मोटर साइकिल निर्यात की जाती थी जिसमे वहां के युवकों की मुख्य पसंद बजाज पल्सर तथा हीरो की बाइक रही है।

इस निर्यात के बदले हमे ईरान से सस्ता क्रूड आयल आता था जो कुलमिलाकर किसी भी दृष्टिकोण से देशहित में रहा है।

मोड़ी सरकार द्वारा अचानक नीतियां बदल दी गई और आज किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा।

बजाज साहब द्वारा की गई अलोचना से पहले भी हीरो ग्रुप के मुंजाल साहब ऐसी ही बातें सार्वजनिक मंचो से उठा चुके हैं जबकि फ्रझांजली प्रमुख रामदेव के निकटतम माने जाते है।

साइकिल और मोटर साइकिल उद्योग की बर्बादी के साथ साथ कितने रोजगार भी ख़तम हुए होंगे इसका अनुमान लगाया जा सकता है।।

फिर भी श्रीमान मोदी जी की चॉइस मैडम सिटा रमण बोलती कि सरकार को क्रिटिसाइज करने से इन्वेस्टमेंट नहीं आता।

इन मैडम और इनके मै डमे से कोई सवाल करे कि अाई हुए इनकम ख़तम करने के पीछे क्या जुम्मन शेख आया था


डाक्टर प्रमोद पाहवा

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