विरोध की आजादी -प्रमोद पाहवा

ABP न्यूज सुबह से इस बच्ची अनु दुबे ( Anu Dubey ) के समाचार पर रिपोर्टिंग कर रहा है।

यह बेटी एक बोर्ड लेकर संसद के बाहर अकेली खड़ी थी तो संसद मार्ग पुलिस इसको धारा 144 के उल्लंघन के अपराध में उठा कर ले गई।

इसका अपराध हैदराबाद की बलात्कार और हत्या की घटना पर सवाल खड़े करना था कि ये कब तक डर कर जिए ?

इसकी पिटाई और बदतमीजी के साथ साथ इससे जबरदस्ती माफीनामा भी लिखवाया गया।

विदेशो में हमने देखा है कि यदि एक व्यक्ति भी ऐसा विरोध लेकर सड़क किनारे खड़ा हो जाए तो सरकार और कानून निर्माता हिल जाते है।

वैसे किसी न्यूज चैनल द्वारा इस प्रकार की घटना को प्रमुखता से रिपोर्ट करने का अर्थ साफ है कि काका तो गयो !

डर ख़तम होने का अर्थ तानाशाह का बाथरूम या बंकर से समाचार भी होता है।

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