सूचनाओ से फ़ैल रहा अवसाद

सूचनाओ से फ़ैल रहा अवसाद :-
हमें यह नहीं भूलना चाहिए की किसी भी जानकारी या सूचना से ही हमारे विचार बनते हैं। अगर हम लगातार एक की तरह के जानकारी या सूचना लेते रहते हैं तो हमारे विचार भी उस जानकारी या सूचना के प्रति आसक्त होते जाते हैं। #कोरोनावायरस के दौर में हमें यह ध्यान रखने की जरूरत है की हमें सिर्फ इससे बचाव रखने की जानकारी लेनी है ना कि इससे होने वाले नुकसान की, कोरोना के बारे में जानकारी के लिए हम 15 मिनट की सूचना ही काफी है इससे हमें पता चल जाएगा कि दुनिया में क्या हो रहा है। लेकिन अगर हम हर 15 मिनट के बाद #कोरोनावायरस के बारे में सुनेंगे और उसका विजुअल देखेंगे या उसी के बारे में लोगों से सुनेंगे फिर अगले 1 घंटे तक उसके बारे में ही बातें करेंगे तो अपनी पूरी ऊर्जा सिर्फ उस बीमारी और उससे होने वाले नुकसान के विचार आपको मृत्यु की और आतंकित और चिंता करने वाले हो जाएंगे। अगर हमने लगातार वही देखा, वही पढ़ा वही संदेश चार बार फिर सुना और पढ़ा ही नहीं औरों को भी सुनाया और फिर बहुत से लोगों को भेजा इससे हम लोगों के मन में डर और चिंताओं को कई गुना बढ़ा रहे हैं। वायरस इतना डर और चिंता पैदा नहीं कर रहा जितना यह संदेश एक दूसरे को भेजने से पैदा हो रहा है। सूचनाओं का आदान-प्रदान हमारे मन पर प्रभाव डाल रहा है और हमारे मन और शरीर दोनों कमजोर हो रहे हैं मन कमजोर होने पर उस बीमारी का अपने ऊपर होने की संभावना भी बढ़ जाती है, जब हम इतनी सारी जानकारियां एक दूसरे को सुना रहे हैं, बांट रहे हैं तो सबसे बड़ी सावधानी यह होनी चाहिए कि हम इससे संबंधित किसी भी संदेश को ना ही आगे भेजेंगे ना ही उसे सुनें।
डॉक्टर ने हमें जो बताना या सरकार ने जो हमें बताना है वह टेलीविजन में आ जाएगा उसके लिए इतनी सारी जानकारियां जानने की आवश्यकता नहीं है, इस प्रकार की जानकारियों से बचाव नहीं होता बल्कि रिस्क फैक्टर और भी बढ़ जाता है। हमें लगता है कि ये मैं क्या कर रहा हूं और पर ये प्राकृतिक रूप से होता है और ये हमारे भावनात्मक स्वास्थ्य को कमजोर कर रहा है ।
माना एक गाड़ी में हम कहीं जा रहे हैं। अचानक सामने एक गाड़ी आती है तो हम थोड़ी देर के लिए डर जाते हैं कि कहीं एक्सीडेंट ना हो जाए लेकिन यह डर कितनी देर का होता है 5 मिनट या ज्यादा से ज्यादा वह आपके मन पर एक घंटा और रह जाएगा एक दिन में आप उसे भूल ही जाएंगे लेकिन यहां तो कोई बोलने का मौका ही नहीं दे रहा आप इस वायरस को थोड़ी देर के लिए भूलने की कोशिश करते हैं तो उसके कुछ मिनट बाद ही कोई ना कोई बहुत प्यार से आपको वापस याद दिला देता है किसी चीज के बारे में अगर हम सिर्फ वही सोचेंगे और वही बोलेंगे तो वह हमारे मन में बैठ जाएगा।
पिछले 1 महीने से हम चिंता तनाव सरदर्द के साथ जी रहे हैं जब ये स्थाई हो जाएगा तो हमारा सीधा असर हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ेगा।
डब्ल्यूएचओ ने बताया कि औसतन पांच लोगों में से एक में अवसाद के लक्षण है या अवसाद होने की संभावना है यह महामारी से पहले के आंकड़े है, अब अचानक से यही स्थिति सामने आई और हमने पूरे विश्व में इस चिंता को और नॉर्मल कर दिया क्या हम 1 मिनट कल्पना कर सकते हैं। कि यह डर बढ़ेगा तो जिन 4 लोगों में डिप्रेशन के लक्षण नहीं थे उनमें से भी कोई एक दो को यह लक्षण होने वालों की सूची में शामिल हो सकता है इसका मतलब है इसकी चिंता स्थाई हो तो हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर इसका बहुत असर आने वाला है।
हम एक वायरस से बचने के बारे में तो सोच रहे हैं लेकिन सोचने का तरीका गलत है कि हम एक और महामारी खड़ा कर रहे हैं यह वायरस निश्चित तौर पर खत्म हो जाएगा अधिकांश लोग ठीक हो रहे हैं और हम सब भी धीरे-धीरे ठीक हो जाएंगे लेकिन अगर हमारे डरने से किसी एक दो को अवसाद हो जाता है तो भले ये वायरस एक दो महीने में खत्म हो जाए लेकिन अवसाद खत्म नहीं होगा क्योंकि यह हमारे मन को के अंदर घूम रहा है इसलिए हमें विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है अगर हम इसके बारे में इतना डर और चिंता का माहौल बनाएंगे तो जितने लोगों को डिप्रेशन है वह और भी बढ़ जाएगा जिनको नहीं है उनको होने की संभावना बढ़ जाएगी वायरस खत्म हो जाएगा पर अवसाद न शायद जीवन का हिस्सा भी बन सकता है।
तो एक चीज का ध्यान रखना है। लेकिन इसके डर से हमारे जीवन में हमें मुश्किलों नहीं ला सकते इसके लिए हमें अपनी सोच और आदतों पर ध्यान रखना ही पड़ेगा हमारी इमोशनल हैल्थ का हमारी मेंटल हैल्थ पर सीधा असर पड़ता है कितने आंकड़े हैं देश और विश्व में जिनको हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग या कैंसर के है क्या हम कल्पना कर सकते हैं इस डर का उन बीमारियों पर क्या असर पड़ेगा इसलिए मेरी राय है कि आप कम से कम इस वायरस की जानकारियों का आदान प्रदान करें जो आवश्यक सूचना होगी वह सरकार या टेलीविजन के माध्यम से आपको बता दी जाएगी, सोशल मीडिया पर आप कोरोना वायरस की जानकारियों का आदान प्रदान ना करें आप अपने घर में रहिए और बहुत सारे रचनात्मक कार्य जैसे पेंटिंग कविता लिखना या इंडोर गेम्स खेल कर इस संकट के अपने मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर से बच सकते हैं।
©राजेश

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