शर्म की बात पर गर्व करना हमे आ गया है

शशि थरूर कह रहे हैं कि धर्म के आधार पर नागरिकता संशोधन बिल भारत को पाकिस्तान का हिंदुत्व वर्ज़न बना देगा.

शशि थरूर को पता नही है कि इस सरकार का कम्पीटीशन पाकिस्तान, बांग्लादेश से ही है? ये सरकार तमाम क्षुद्र भावनाओ और मानसिकताओं की बराबरी में ही भरोसा रखती है, उसी में इस सरकार की “मर्दानगी” है, 56 इंच है.

उद्दात्त भावनाएँ और मानसिकता जो प्रेम, सौहार्द्र, सहिष्णुता, समानता की बात करती हैं, जिनके लिये वाक़ई हिम्मत और विवेक की आवश्यकता होती है, मगर जो एक राष्ट्र को खोखले विकास नही सुविकसित समाज की ओर ले जाती हैं, जिनमे सख़्त निर्णय नही सुचिंतित निर्णयों की ज़रूरत होती है, उन्हें पहले ही कमज़ोरी बना दिया गया है. बुद्धिजीविता उपहासास्पद हो गई है और अज्ञान, आक्रामकता व बल प्रशंसनीय, सत्ता के पास लाठी है, और बल ही नीति सूत्र है इसलिये सेना और पुलिस का प्रयोग बढ़ गया है, मीडिया भी आक्रामक रहता है, मर्दानगी सब जगह से फूट फूट कर निकल रही है, स्त्रियों पर ही नही.

स्वतंत्र भारत का आदर्श संकुचित मानसिकता, भावना, आज्ञानऔर बल के अहंकार का नही था, उसका गुरूर विज्ञान, समता, सहिष्णुता और सांस्कृतिक सामाजिक विविधता की आश्चर्यजनक एकता में था, इसके संविधान की आत्मा इन मूल्यों में थी उन्हें नष्ट करके संविधान दिवस स्थापित कर दिया गया.

हम पाकिस्तान का हिंदुत्व वर्ज़न बनने जा रहे हैं, शर्म की बात पर गर्व करना हमे आ गया है. कनुप्रिया 

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