लाकडाउन की सबसे अधिक मार गरीब और रोजमर्रा कमा कर जीवन जीने वाली जनता पर ही पड़ी है।

लाकडाऊन में रामलाल :-

देश के प्रधानमंत्री सिर्फ़ बड़ा सोचते हैं इसीलिए वह सिर्फ़ बड़े लोगों के लिए सोचते हैं , बड़े सपने देखते हैं और उसे साकार करने के लिए बड़े लोगों पर ही निर्भर रहते हैं।

उनके तमाम अचानक लिए फैसले गरीब लोगों पर भारी पड़ते हैं। लाकडाउन का फैसला ही लीजिए। इससे सबसे अधिक मार गरीब और रोजमर्रा कमा कर जीवन जीने वाली जनता पर ही पड़ी है।

लाईडाउन देश के लिए आवश्यक था परन्तु नोबंदी टाईप का यह तरीका उनके लिए बेहद कष्टदायक है जो घर से 500-1000 किमी दूर रोज़ी रोटी के लिए गये और दिहाड़ी पर जीवन गुज़र कर रहे हैं।

एक उदाहरण से इनकी पीड़ा को समझिए

कोई एक हफ्ते पहले यह भगवाधारी रामलाल महोदय मेरे घर पर आकर गिड़गिड़ाने लगे कि बच्चे और उनका परिवार 3 दिन से भूखा है उनकी मदद करिए।

फिर अचानक उसे जाने क्या सूझा कि वह मेरा धर्म जानकर मुझे बार बार सफाईयाँ देता रहा कि उसने या उसके परिवार ने कभी मोदी को वोट नहीं दिया।

मैंने कहा कि मोदी जी को वोट दिया भी हो तो भी क्या फर्क पड़ता है ? फिर मैंने पहले तो उनको सरकार द्वारा खाद्य रसद विभाग के जारी तमाम नंबरों पर फोन करने को कहा और उसने किया तो उसे अगले दिन मदद का आश्वासन मिला।

पर तुरंत मदद के तौर पर मैंने उसे ₹100 दिया और कहा कि सरकारी मदद कल पहुँच जाएगी यह रख लो आज रात का आटा सब्जी लाकर भोजन बना लेना।

तीसरे दिन यह शख्स फिर मेरे पास आया और बताया कि सरकार द्वारा मदद के लिए जारी नंबरों पर सैकड़ो फोन करने के बावजूद उसे कोई मदद नहीं मिली।

मैंने स्वयं तुरंत ट्विटर पर जिलाधिकारी प्रयागराज , पुलिस से लेकर उत्तर प्रदेश सरकार तक से इसे मदद करने के लिए निवेदन किया पर कोई संज्ञान नहीं लिया गया मदद की बात तो बहुत दूर की है।

मैंने उससे पूछा कि काम क्या करते हो ? तो पता चला कि वह राज मिस्त्री है जो मध्यप्रदेश के सिंगरौली का रहने वाला है। मैंने उससे कहा कि घर के कुछ रिपेयरिंग का काम कर दो , तो तुम्हारा उस पैसे से कुछ दिन काम चल जाएगा और उसने किया।

कल यह भगवाधारी शख्स फिर मेरे पास आया , पता चला सरकार और प्रशासन की तरफ से उसे कोई मदद नहीं मिली और मेरे द्वारा उसे दिए ₹800 वह एक हफ्ते में खर्च करके फिर उसी स्थीति में पहुँच चुका है।

तब मैंने ट्विटर पर उत्तर प्रदेश काँग्रेस , उसके प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और Priyanka Gandhi Vadra को मेन्शन करके मदद की अपील की।

मेरे पास 10 मिनट में काँग्रेस के मीडिया कोआर्डिनेटर Ranish Jain और फिर अगले 10 मिनट में इलाहाबाद काँग्रेस के नगर अध्यक्ष नफीस अनवर का फोन आ गया और अगले एक घंटे में उस भगवाधारी रामलाल को इतना राशन उपलब्ध करा दिया गया कि उसका परिवार एक हफ्त्ता भूखा नहीं रह सकता।

प्रियंका गाँधी द्वारा बनाए रिलीफ टास्क फोर्स और इस पूरी टीम को सलाम।

कहने का अर्थ यह है कि सरकार भी लोगों की मदद करती ही होगी पर इस देश में करोड़ों रामलाल भी होंगे जो इस अचानक लिए फैसले से प्रताणित हो रहे होंगे।

कई दिहाड़ी रहीम या करीम भी होंगे जिनको सरकारी मदद मिल रही हो यह कहना और भी मुश्किल है , वह छुपे जो होते हैं।

यह एक उदाहरण अचानक लिए लाकडाउन में गरीबों की स्थीति समझने के लिए काफी है।

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